Letter Meaning in Hindi – लेटर क्या होता है

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आज के topic पर हमे हिन्दी पत्र के बारे में Letter Meaning in Hindi में जानकारी प्राप्त करेंगे ,आप इसे जरुर पढ़ें l

letter meaning in hindi


दोस्तों Letter का एक अर्थ होता है कि यह पत्र -लेखन एक कला है 


आधुनिक युग पर पत्र-लेखन को कला की संज्ञा दी गई है। प्रत्रों में आज का कलात्मक अभिव्यक्तियों हो रही है। ओर साहित्य में भी इसने उपयोग होना लगा है जिस प्रत्रों में जितने स्वाभाविकता होगा वह भी उतना प्रभावकारी होगा यह एक अच्छे पत्र के लिए कलात्मक सौंदर्यबोध ओर अंतरंग भावनाओं का अभिव्यंजन आवश्यक है।


पत्र में उसके लेखक के भावनाओं है व्यक्त नहीं होता है बल्कि यह उसके व्यक्तित्व भी उभरता है।

इसके लिए लेखक के चरित्र, दृष्टिकोण, संस्कार, ओर मानसिक स्थिति आचरण इत्यादि सभी एक साथ झलकते है।


पत्र लिखकर एक प्रकार का कलात्मक अभिव्यक्ति है। अगर इस प्रकार की अभिव्यक्ति व्यावसायिक पत्रों की अपेक्षा सामाजिक तथा साहित्यिक पत्रों में अधिक होती है।

अच्छे पत्र की विशेषताएँ -


सरल भावशैली (भाषाशैली)

विचारों की सुस्पष्टता

संक्षिप्त (संक्षेप) और संपूर्णता

प्रभावान्विति

बाहरी सजावट


(क) सरल भावशैली (भाषाशैली)-


पत्र का भाषा साधारणतः सरल ओर बोलचाल के होते चाहिए । शब्दों का प्रयोग में सावधान रखने चाहिए यह उपयुक्त सटीक, सरल ओर मधुर हों 

सभी बात सीधे ढंग से स्पष्ट ओर प्रत्यक्ष लिखने चाहिए बात की घुमा कर या फिराकर लिखने उचित नहीं।


(ख) विचारों की सुस्पष्टता-


पत्र पर लेखक के विचार सुस्पष्ट ओर सुलझे होने चाहिए! कहा भी पांडित्य-प्रदर्शन चेष्टा नहीं होनी चाहिए बना वटीपन नहीं चाहिए दिमाग पर बल बातों नहीं लिखा जाने चाहिए ।


(ग) संक्षिप्त (संक्षेप) और संपूर्णता-


ओर पत्र अधिक लंबी होना नहीं चाहिए वह अपने में संपूर्ण को संक्षिप्त हो। उसमें अतिशयोक्ति, वाग्जाल ओर विस्तृत विवरण के लिए स्थान नहीं है इसलिए अतिरिक्त पत्र में एक ही बात को बार बार इन सारी बातें एक क्रम में लिखनी चाहिए! 

इसमें कोई भी आवश्यक तथ्य तथ्य छूटने न पाए। पत्र अपने में संपूर्ण हो, अधुरी नहीं है ! 


(घ) प्रभावान्विति-


पत्र का अक्सर पढने वाले पर पडना चाहिए! 



(ङ) बाहरी सजावट-


पत्र की बाहरी सजावट से हमारे तात्पर्य यह है कि 

1. उसके कागज संभवतः अच्छा से अच्छा होना चाहिए, 2. लिखा वट सुंदर ओर साफ या पुष्ट हो;  3. विरामादि चिह्नों का प्रयोग यथास्थान किया जाए;4. तिथि, शीर्षक, अभिवादन, अनुच्छेद ओर अंत अपने अपने स्थान पर क्रमानुसार होने चाहिए 5.पप्र का पंक्तियाँ सटाकर न लिखी जाएँ और 6.पप्र का काग़ज़ लंबी चैङा होना चाहिए।


पत्रों के प्रकार (Type of letter)
सामान्यतः पत्र तीन प्रकार के होते है-


(1) सामाजिक पत्र (Social lettters)

 

(2) व्यापारिक पत्र (Commercial letters)


(3) सरकारी पत्र (Official letters)


सामाजिक पत्राचार-


यह पप्र व्यवहार को सामाजिक पत्राचार कहते हैं इसके लिए अंतर्गत वे पत्रादि आते है, जिन्हें लोग अपने दैनिक जीवन के व्यवहार में लाते है। इस प्रकार के पप्र अनेक रुप प्रचतिल है।



 इस प्रकार के पत्रों के अनेक रूप प्रचतिल है। कुछ के उदाहरण निम्नलिखित है-

1. संबंधियों के पत्र, 2. बधाई पत्र, 3. शोक पत्र , 4. परिचय पत्र, 5. निमंत्रण पत्र एवं 6. विविध पत्र


इस तरह से पत्र को समाज को एक कलात्मक देन है चुकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, इसके लिए दुसरो को साथ ही अपने संबंध किसी भी माध्यम से बनाए रखना चाहता है। मिलता जुलते रहने पर लेखन को तो आवश्यक नहीं होता है, 

परन्तु एक दूसरे से रहने पर एक व्यक्ति दुसरे के पास पत्र लिखता है।


सरकारी पप्र की अपेक्षा सामाजिक पत्र में कलात्मकता अधिक रहती है क्योंकि इनमें मनुष्य के हृदय के सहज उद्गार व्यक्त होते है। इन पत्र को पढकर हम किसी भी व्यक्ति के अच्छे या बुरे स्वभाव या मनोवृत्ति का परिचय आसान से पा सकते हैं, इन पत्र को पढकर हमें किसी भी व्यक्ति का अच्छे या बुरे स्वभाव या मनोवृत्ति का परिचय आसानी से पा सकते है। खासकर व्यक्तिगत पत्रों 


एक अच्छे सामाजिक पत्र में सौजन्य सहृदयता ओर शिष्टता का होना आवश्यक है। ओर तभी इस प्रकार के पत्र अभीष्ट प्रभाव हृदय पर पङता है। इसके कुछ तभी इस प्रकार का पत्रों का

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